पुस्तक-लेखन के लिए बुलन्दशहर के डीएम को मिलेगा ‘अमृत लाल नागर पुरस्कार'

 


पुस्तक-लेखन के लिए जिलाधिकारी बुलन्दशहर को मिलेगा एक लाख रूपये का ‘अमृत लाल नागर पुरस्कार


पुरस्कार समिति की संस्तुति के आधार पर राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान, उ0प्र0 द्वारा वर्ष 2019-20 के लिए जिलाधिकारी बुलन्दशहर श्री रविन्द्र कुमार द्वारा हिन्दी भाषा मंें लिखित पुस्तक ‘एवरेस्टः सपनों की उड़ान: सिफर से शिखर तक’ का चयन ‘अमृत लाल नागर पुरस्कार’ के लिए किया गया है। इस पुरस्कार के तहत उन्हें 01 लाख रूपये की धनराशि प्रदान की जायेगी। श्री रविन्द्र कुमार को यह पुरस्कार दिनांक 15 मार्च, 2020 को लखनऊ स्थित हिन्दी संस्थान के ‘यशपाल सभागार’ मंे आयोजित ‘पुरस्कार एवं सम्मान’ समारोह में प्रदान किया जायेगा। 
       वर्तमान में बुलंदशहर में तैनात जिलाधिकारी रविंद्र कुमार वर्ष 2011 बैच के युवा आई0ए0एस0 अधिकारी हैं, जिनकी साहसिक खेलों में विशेष रूचि रही है। वर्ष 1981 में बेगूसराय, बिहार के एक किसान परिवार में जन्मे श्री रविन्द्र कुमार ने कई श्रेष्ठ अकादमिक लक्ष्यों को हासिल किया है, चाहे वर्ष 1999 में प्रथम प्रयास में आई0आई0टी0 प्रवेश परीक्षा में चयन हो या वर्ष 2011 में सिविल सेवा परीक्षा में सफलता। 
जहाजरानी में लगभग एक दशक तक कार्य करने के पश्चात, यह वर्ष 2011 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए और वर्ष 2013 में अपने प्रथम प्रयास में एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ गए। ऐसा करने वाले यह भारत के प्रथम आईएएस अधिकारी हैं, जिसके लिए इन्हें सिक्किम खेल रत्न अवार्ड, बिहार विशेष खेल सम्मान, कश्ती रत्न अवार्ड, अटल मिथिला सम्मान जैसे अनेक पुरस्कारों से नवाजा गया।




वर्ष 2015 में अपने दूसरे एवरेस्ट अभियान के दौरान इन्होंने नेपाल के भूकंप एवं हिमस्खलन का सामना किया, जिससे वहां जान-माल की काफी क्षति हुई, परन्तु अपनी जान की परवाह किए बगैर इन्होंने कई लोगांें की जान बचाई। 
गत वर्ष 2019 में फिर से माउण्ट एवरेस्ट की चोटी चढ़े और वहाॅ से ‘स्वच्छ भारत मिशन’, ‘नमामि गंगे’ हेतु जन-जागरण किया एवं देशवासियों से जल संरक्षण की अपील की। वह प्रथम एवं एक मात्र ऐसे सिविल सर्वेन्ट हैं, जिन्होंने दो बार माउण्ट एवरेस्ट पर दोनों पृथक-पृथक मार्गों से चढ़ाई की है। इस विषय में उन्होंने ‘शिखर से पुकार’ नामक लघु डाॅक्यूमेंट्री फिल्म के माध्यम से जल संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता हेतु प्रचार-प्रसार किया।



 
पूर्व में एक अच्छे तैराक और कराटे में ब्लैक बेल्ट रहे, श्री कुमार बंजी जम्पिंग, स्कूबा डाइविंग, घुड़सवारी, मैराथन दौड़ सहित सहित कई अन्य साहसिक कार्य कर चुके हैं। 
आईएएस अधिकारी के रूप में इन्होंने सिक्किम और उत्तर प्रदेश में मुख्य विकास अधिकारी, जिलाधिकारी सहित कई अन्य पदों पर कार्य किया है।


 



भारत सरकार के केन्द्रीय मंत्री के निजी सचिव के रूप में भी आपने कार्य किया है।
अपने पर्वतारोहण को लेकर उन्होंने हिन्दी एवं अंग्रेजी भाषा में दो पुस्तकें-‘मैनी एवरेस्ट्सः एन इन्स्पायरिंग जर्नी आॅफ ट्रांसफार्मिंग ड्रीम्स इन्टू रियलिटी’ एवं ‘एवरेस्ट: सपनों की उड़ान: सिफर से शिखर तक’ लिखी हैं। ‘एवरेस्ट-सपनों की उड़ानः सिफर से शिखर तक’ के माध्यम से एवरेस्ट को एक भौतिक बाधा की सीमा से बाहर जीवन की समस्याओं के प्रतीक के रूप में चित्रित किया है। इसके साथ ही ‘अग्रवर्ती सकारात्मक मानसिक चित्रण’ नाम से वर्णित सफलता की अपनी कुंजी को समाज के साथ साझा करते हुए जीवन के विभिन्न एवरेस्ट फतह करने के अद्भुत तरीके को समझाया है। 
लेखक का तथ्य इस बात पर आधारित है कि हमारा मस्तिष्क किसी अन्य संवेदी धारणा जैसे बोलना, सुनना, गंध, स्पर्श इत्यादि से पहले किसी भी चीज की तस्वीर को ग्रहण करता है। हालांकि, यह हमारे दैनिक जीवन में रोजाना होता रहता है परन्तु फिर भी हम इसका अहसास नहीं करते हैं। 
लेखक ने न केवल रोजमर्रा की जिन्दगी में किये गए अपने अवलोकन का उल्लेख किया है, बल्कि पुरानी और नवीनतम वैज्ञानिक अनुसंधानों के बिन्दुओं को जोड़कर इसे वैज्ञानिक ढंग से सरलतम अंदाज में समझाने की कोशिश की है। इसमें आइंस्टीन के सापेक्षता सिद्धान्त, प्राच्य योगियों द्वारा की गयी खोज, आधुनिक विश्वविद्यालय जैसे हार्वर्ड मेडिकल स्कूल, लेनिनग्राद सैन्य प्रयोगशाला आदि द्वारा मानव मस्तिष्क पर किए गए प्रयोग शामिल हैं।
आम लोगों की जीवन मेें  इस तकनीक के चमत्कारी प्रभाव को अपने जीवन में उदाहरण के माध्यम से प्रदर्शित करते हुए लेखक ने पाठकों को बताया है कि एक आम  पृष्ठभूमि से आने और संघर्षपूर्ण जीवन के बावजूद किस तरह इस तकनीक का उपयोग कर अल्पावधि में सफलता के कई प्रतिमान गढ़े जा सकते हैं। 
बुलन्दशहर डीएम  रविन्द्र कुमार ने अपनी यह पुस्तक उन सभी आम लोगों को समर्पित की है, जो अभी भी अपने अपूर्ण सपने को साकार करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनकी कामना है कि ऐसे संघर्षरत लोग हमेशा उत्तम स्वास्थ्य, धन-सम्पत्ति, शांति और समृद्धि के महासागर में तैरते रहे। 


बुलन्दशहर जिला सूचना विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर प्रेषित।


 


 


सलाम इंडिया