कुछ पंक्तियां पेश कर रहा हूँ, पसन्द आए तो शेयर जरूर करें
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लोग घरों में बंद हैं और वो जमात लगाए बैठे हैं,
अब जो बेपर्दा हुए तो मजहब बीच में घुसाए बैठे हैं !!
जहां इबादत में हाथ उठने थे, वहाँ पत्थर उठाए बैठे हैं
जिन का अहसान मान लेना था उन्हें ग़ाली सुनाए बैठे हैं, इंसानियत की चिंता होती तो यूँ मजमा ना लगाते,
अब जो बेपर्दा हुए तो मजहब बीच में घुसाए बैठे हैं !!
सलाम इंडिया के लिए अंकित मिश्रा ने ये पंक्तियां भेजी हैं।
आप भी अपने विचारों के लिए स्वतंत्र हैं ,
हम देंगे आपको मंच।
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