वर्तमान परिदृश्य - इंडिया बनाम भारत

 


 



विश्व पटल पर देखने पर यूं तो संपूर्ण देश भौतिक रूप से एक ही नजर आता है, परंतु अगर आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक दृष्टिकोण से देखें तो यह मुख्यतः इंडिया और भारत नामक दो हिस्सों में बटा हुआ प्रतीत होता है। संभवतः देश अपने संविधान की प्रस्तावना जो आर्थिक और सामाजिक न्याय की बात करती है, का पूर्ण रूप से परिपालन करने में असमर्थ  रहा है। जहां एक ओर सड़कों पर भोजन के लिए लगी हुई कतारें आर्थिक दरिद्रता को इंगित करती हैं  वहीं बचे हुए खाने का निस्तारण अभी भी एक समस्या बना हुआ है। कुपोषण और मोटापा भी तो इस देश में साथ - साथ ही चल रहे हैं, जो कहीं ना कहीं इस देश की  दो अलग -अलग तस्वीरें पेश करते हैं। एक ओर जहां भारत अभी भी भूख, बेरोजगारी और खराब स्वास्थ्य सुविधाओं से लड़ रहा है वहीं इंडिया बुलेट ट्रेन पर काम कर रहा है। यह भारत और इंडिया के बीच की शिक्षा के अंतर का उदाहरण मात्र ही तो है, कि एक तरफ लोग स्वास्थ्य कार्मियों के सम्मान में अपनी बालकनी से घंटी बजा रहे हैं वहीं कुछ अपनी छत से पत्थर। विश्व के अनेक उदाहरण हमें यही सिखाते हैं, कि कोई भी देश तब तक शांति और उन्नति की राह पर अपेक्षाकृत उम्दा प्रदर्शन नहीं कर सकता जब तक कि वह अपने समाज के आर्थिक व सामाजिक अंतर को प्रभावशाली रूप से पाट नहीं लेता। भविष्य में   उम्मीदें तो हैं परंतु भारत अभी इंडिया से कुछ दूर ही दिखाई देता है।



सलाम इंडिया के लिए विरल तेवतिया।


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