शव दफनाने को लेकर हुए टकराव को प्रशासन ने सूझबूझ से टाला।

 बुलंदशहर कोतवाली देहात क्षेत्र के गांव सराय छबीला में  एक बुजुर्ग के शव को दफनाने को लेकर गांव में दो समुदाय आमने सामने आ गए,जैसे ही जिला प्रशासन को सूचना मिली तत्काल अफसर मौके पर पहुंचे ।वजह जानने की कोशिश की गई तो जानकारी मिली कि गांव के ही असगर अली का दिल्ली में इंतकाल हुआ था और वहां से फिर उनके शव को दफनाने के लिए परिजन गांव लाये थे,जानकार बताते हैं कि असगर अली ने  सराय छबीला गांव में ही  अपनी कुछ जमीन के टुकड़े पर एक स्कूल बनवाया था और  उनकी मंशा यही थी कि गांव के सभी बच्चे  पढ़ें , साथ ही उनकी ख्वाहिश थी कि उन्हें  स्कूल में ही  सुपुर्द ए खाक भी किया जाए  ।


   लेकिन जब  परिजन  असगर अली की अंतिम इच्छा पूरी  करने के लिए  गांव में पहुंचे  तो वहां लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई और जो आखिरी ख्वाहिश थी  उस पर लोगों को आपत्ति होने लगी ,इतना ही नहीं कुछ ने तो यहां तक कह दिया  कि दिल्ली में मौत हुई है तो वहीं सुपुर्द ए खाक कर देना था । गांव में लेकर क्यों आए  तो कुछ ने तो यहां तक  कह दिया कि उनके  आसपास अगर शव को दफनाया गया तो महामारी फैलने का खतरा है जितने लोग उतनी बातें होने लगी  भीड़ बढ़ती जा रही थी  ऐसे में सूचना जिला प्रशासन तक पहुंची तो अफसरों ने आकर लोगों को समझाया बुझाया ।


 यह बुलंदशहर के गांव सराय छबीला का मुस्लिम जूनियर हाई स्कूल है..…



जिसे असगर मियां ने इस मंसूबे के साथ स्थापित किया था कि गांव के बच्चों का भविष्य सुधरेगा ,उन्हें शिक्षा मिलेगी।



जानकारी देते ग्रामीण...


परिजनों की मानें, असगर मियां चाहते थे कि उन्हें यहीं  सुपुर्द ए खाक किया जाए , आज असगर मियां का दिल्ली में अचानक निधन हो गया। सुपुर्द-ए-खाक करने के लिए असगर मियां का शव गांव में लाया गया लेकिन लोगों के विरोध में अंतिम इच्छा दम तोड़ गयी।क्योंकि ख्वाहिश के मुताबिक लोगों ने कोशिशें तो कीं लेकिन विरोध में ख्वाहिश दफन हो गयी। जैसे ही गाँव के कुछ लोगों को पता चला कि असगर मिया की मौत दिल्ली के अस्पताल में हुई है। लोगों ने कोरोना से मौत की बात कहते हुए हंगामा   तक भी करना शुरू कर दिया, स्कूल में शव को दफनाने का विरोध शुरू कर दिया।औऱ प्रशासन ने लोगों को काफी समझाया।



सूचना पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी गांव पहुंचे त मौके पर इकट्ठा भीड़ को  समझाया गया 


एडीम प्रशासन रविन्द्र कुमार व एसपी सिटी अतुल श्रीवास्तव लॉकडाउन का हवाला देकर ग्रामीणों को समझते  समझाते रहे ,सोशल डिस्टेंसिंग अपनाने को सीओ  सिटी स्वयम लाउडस्पीकर लेकर प्रयास करते रहे ।लोगों की भीड़ को तितरबितर किया गया। 



अफसरों ने दोनों पक्षों से बात करने के बाद तय किया कि असगर मियां के शव को स्कूल के बजाय  ग्रामीणों की इच्छा केे मुताबिक कब्रिस्तान में दफनाया जाएगा। इसपर दोनों पक्ष रजामंद भी हो गए।   प्रशासन की अपील को असगर अली के परिवारीजनों ने स्वीकार कर लिया और फिर कब्रिस्तान में  ही दो गज जमीन खोदी गयी और असगर अली की इच्छा के मुताबिक खोदे गयी एक कब्र को भरकर दूसरी कब्र में उन्हें दफना दिया गया।


इस बारे में हरचरण जो कि स्थानीय निवासी हैं उन्होंने बताया कि गांव वाले स्कूल में असगर मियां के शव को दफनाने को लेकर कतई भी तैयार नहीं हुए ।तो वहीं  हरिचंद जो कि स्थानीय निवासी हैं ने बताया कि असगर मियां  ने गांव में बड़ी मेहनत से स्कूल का निर्माण करवाया था। आज उनकी  मौत हो गई तो  गांव में कोरोना की बात कहकर उनके जनाजे को स्कूल में दफनाने नहीं दिया गया जबकि यह उनकी अंतिम इच्छा थी बकौल मृतक के भतीजे शाहिद ने बताया कि  उनकी ये अंतिम इच्छा थी जो पूरी नहीं हुई।


 



जानकारी देते एडीएम प्रशासन रविन्द्र कुमार...


इस बारे में स्कूल में शव दफनाने को लेकर आज सराय छबीला में दो पक्ष आमने सामने आ गए थे। विवाद को निपटा दिया गया है,शव कब्रिस्तान में  सुपुर्द-ए- खाक कर दिया गया है।
सलाम इंडिया डेस्क रिपोर्ट।


 


सलाम इंडिया पर आप भी रख सकते हैं किसी भी विषय पर बेबाक़ी से राय ....


सलाम इंडिया  आपको भी देगा अवसर आप भी अपनी तश्वीर हमें भेज सकते हैं हम करेंगे प्रेषित।


सलाम इंडिया न्यूज़  देगा आपको मंच ।
मेट्रो सिटीज से लेकर गांव के गलियारों तक है हमारी पहुंच....


सौरभ कुमार सिंह


वाट्सअप...
9058323237
9236038222